Thursday, August 21, 2008

खामोशी

कभी सुख , कभी दुःख का
रूप लेती हैं खामोशी ।
झगडे के बाद की खामोशी
सब को लुभाती हैं ,
पर मृत्यु के बाद की खामोशी ,
किस का मन मोह पाती हैं?

किसी के लिए वरदान ,
तो किसी के लिए श्राप
हैं यह खामोशी ।
कही सिसकियों को दबाये
होती हैं अपने में खामोशी ।
तो कभी सुख को
अपने आँचल में लाती हैं खामोशी

खामोशी .........
मृत्यु की शुरुवात का
नाम हैं शायद खामोशी
या ज़िन्दगी का
दूसरा रूप हैं यह खामोशी



साक्षी

1 comments:

Khalid said...

Here I am, on the road again... :)
I like the way you have drawn comparisons and its interesting to know a person with "such high degree of comprehensive power". Like the way you have written it.

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