Thursday, August 21, 2008

ज़िन्दगी

This is the first poem that I wrote. Had written it in class 6th and since then been scribbling .


ज़िन्दगी दुःख और सुख से भरी कहानी हैं ,
खुशियों के दामन से ले कर दुःख के भंडार तक
अंधेरे से ले कर प्रकाश तक का सफर हैं यह ।
ज़िन्दगी एक अनोखी दास्तान हैं
ज़िन्दगी दुःख ..................कहानी हैं ।

सुख के दो घंटे दो पल के तरह लगते हैं
दुःख के दो पल भी बड़े मुश्किल से कटते हैं ।
परन्तु मनुष्य को ज़िन्दगी से मुह नही मोड़ना चाहिए
ज़िन्दगी एक इन्तिहाँ हैं , ज़िन्दगी उम्मीद का दिया हैं ।
ज़िन्दगी को हम कहाँ से कहाँ तक पंहुचा सकते हैं

आसमान को छूने की उम्मीद हैं और
धरती से अम्बर तक पहुचने का प्रयास कर सकते हैं ।

साक्षी

खामोशी

कभी सुख , कभी दुःख का
रूप लेती हैं खामोशी ।
झगडे के बाद की खामोशी
सब को लुभाती हैं ,
पर मृत्यु के बाद की खामोशी ,
किस का मन मोह पाती हैं?

किसी के लिए वरदान ,
तो किसी के लिए श्राप
हैं यह खामोशी ।
कही सिसकियों को दबाये
होती हैं अपने में खामोशी ।
तो कभी सुख को
अपने आँचल में लाती हैं खामोशी

खामोशी .........
मृत्यु की शुरुवात का
नाम हैं शायद खामोशी
या ज़िन्दगी का
दूसरा रूप हैं यह खामोशी



साक्षी

moksh

दुनिया के इस मोह - माया में
फंसा हुआ हैं यह इंसान
रिश्ते नाते के बन्धन में
बंधा हुआ हैं यह इंसान

तोड़ दे सारे बंधन तू अब
तोड़ दे यह माया का जाल
हिब्बा कर दे अपनी दौलत को
त्याग दे तू अब यह संसार

चल अब तू उस शक्ति की ओर
जिसका हैं जग में प्रकाश
हैं ज़हीन की वही अन्तिम मंजिल
हैं मूर्ख का भी वही पर स्थान
आया हैं तुझको भी अब निमंत्रण
त्याग दे तू अब यह संसार


साक्षी